कोरोनावायरस के कारण हर कोई खौफ में है। खून के रिश्ते भी मुंह मोड़ने लगे हैं, लेकिन अनजान लोग मानवता का धर्म निभा रहे हैं। ऐसा ही मामला सोमवार को जयपुर रेलवे स्टेशन पर देखने को मिला। यहां पटना निवासी अस्मिता अपनी 4 साल की बेटी के साथ पीहर नागपुर गई थी। रविवार को लौटते हुए वह गलत ट्रेन में बैठकर जयपुर पहुंच गई। यहां उसने जयपुर और कोटा में रिश्तेदारों को फोन किया, लेकिन उन्होंने घर पर बच्चे होने का बहाना बनाकर आने से मना कर दिया। इस पर रेलवे ने उसे पनाह दी।
अस्मिता ने बताया कि शनिवार को पति उमेश का फोन आया कि अप्रैल की शुरुआत में इंटरव्यू है, घर आ जाओ। उसने बागमति एक्सप्रेस में नागपुर से पटना का स्लीपर श्रेणी में टिकट बुक कराया। रविवार शाम को नागपुर स्टेशन पहुंचने के बाद वह गलती से मैसूर-जयपुर एक्सप्रेस में चढ़ गई। कोच में ज्यादा लोग नहीं थे।
सुबह पूछताछ में पता चला जयपुर आ गई
ऐसे में वह बच्ची के साथ टिकट में अलॉट हुई बर्थ पर सो गई। कोई टीटीई भी कोच चैक करने नहीं आया। सुबह आंख खुली तो ट्रेन जयपुर स्टेशन पर खड़ी थी। वह बच्ची को लेकर उतर गई। इस दौरान स्टेशन पर तैनात आरपीएफ हैड कानिस्टेबल ममता और अशोक कुमार उससे पूछताछ की। तब गलत ट्रेन का पता लगा। इस पर स्टेशन सुपरिंटेंडेंट डीएल तनेजा, आरपीएफ इंस्पेक्टर राजकुमार ने उसे पनाह दी।
अब 1000 किमी दूर नागपुर से बाइक पर लेने आ रहा है भाई
अस्मिता को स्टेशन स्थित रेस्ट रूम में ठहराकर उसे खाना खिलाया गया। घर से ही बच्ची के दूध भी मंगवाकर पिलाया। इसके बाद अस्मिता ने नागपुर में भाई रितेश को फोन कर इसकी सूचना दी और रोने लगी। इसके बाद स्टेशन सुपरिंटेंडेंट डीएल तनेजा ने रितेश से बात की और मामला समझाया। अब रितेश सुबह 10 बजे नागपुर से बाइक पर जयपुर के लिए रवाना हो गया है। जयपुर से नागपुर करीब 980 किमी दूर है। इसे तय करने में 28-30 घंटे लगते हैं। रास्ते में महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश व राजस्थान के बॉर्डर आते हैं।